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BRICS समिट की थीम के 4 स्तंभ असल में क्या संकेत देते हैं? आज ओपन सेशन में भी होगी बात

 Written By: Rituraj Tripathi
 Published : Sep 13, 2026 08:17 am IST,  Updated : Sep 13, 2026 08:25 am IST

BRICS समिट के दूसरे दिन ओपन सेशन होगा, जिसमें नेता ब्रिक्स की थीम के 4 स्तंभों पर बात करेंगे। ऐसे में ये समझना जरूरी है कि ब्रिक्स की थीम के ये 4 स्तंभ क्या हैं।

BRICS summit- India TV Hindi
BRICS समिट की थीम के 4 स्तंभ Image Source : INDIA TV

नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आज दूसरा दिन है। आज इसका ओपन सेशन भी होगा, जिसमें ब्रिक्स की थीम के 4 स्तंभों पर नेता अपने विचार रखेंगे। 

ब्रिक्स की थीम के 4 स्तंभ कौन से हैं?

  • लचीलापन (Resilience)
  • नवाचार (Innovation)
  • सहयोग (Cooperation)
  • स्थिरता (Sustainability)

भारत इन्हीं 4 थीम के जरिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, शहरी विकास, स्टार्टअप्स और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में ठोस सहयोग की ओर ले जाना चाहता है। दरअसल नई दिल्ली घोषणापत्र के ये चार मुख्य विषय तो हैं (लचीलापन, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी) लेकिन ये सभी मिलकर यह समझने का एक उपयोगी जरिया देते हैं कि BRICS बदलती वैश्विक व्यवस्था को किस नज़रिए से देखता है।

लचीलापन

इस थीम का असल मतलब अर्थव्यवस्थाओं के जोखिम को कम करना है। यानी इसके जरिए ये सुनिश्चित करना है कि सप्लाई चेन मजबूत बने और लोकल करेंसी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो। इसका लक्ष्य अलग-अलग तरह के फाइनेंशियल और ट्रेडिंग ऑप्शन के जरिए उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को बाहरी झटकों से कमजोर होने से बचाना भी है।

नवाचार

इस थीम का असली मकसद रणनीतिक क्षमता का निर्माण करना है। दरअसल टेक्नोलॉजी तेजी से जियोपॉलिटिकल ताकत का जरिया बनती जा रही है। ब्रिक्स (BRICS) AI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, अहम टेक्नोलॉजी और स्किल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग को लेकर लगातार विचार कर रहा है और भारत इसमें अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुभव को बातचीत में शामिल कर रहा है।

सहयोग

इस थीम के जरिए ग्लोबल साउथ को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। यानी ब्रिक्स के विस्तार के साथ-साथ इस थीम का मकसद ये है कि ये एक बड़ी सामूहिक आवाज बने। यानी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को उन संस्थाओं में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिले, जिनका ढांचा आज भी काफी हद तक पुरानी दुनिया की झलक देता है।

स्थिरता

इस थीम का मुख्य मकसद ये है कि विकास को जलवायु से अलग नहीं किया जा सकता। यानी विकासशील देशों के लिए, 'ग्रीन ट्रांज़िशन' (पर्यावरण के अनुकूल बदलाव) का मामला फाइनेंस, टेक्नोलॉजी और निष्पक्षता से भी जुड़ा है और ब्रिक्स में इस बात पर जोर है कि जलवायु से जुड़े कदमों में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अलग-अलग शुरुआती स्थितियों और विकास की जरूरतों का ध्यान रखा जाए।

चारों थीम मिलकर बनाती हैं एक बड़ा नजरिया

अगर ब्रिक्स की थीम के इन चारों स्तंभों को एक साथ देखा जाए तो ये बड़े नजरिए की ओर इशारा करती हैं। दरअसल इन थीमों का बड़ा नजरिया ये है कि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की ओर से ज्यादा रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) हासिल हो। ऐसा होने से इन अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक तौर पर मौजूदा वैश्विक व्यवस्था के भीतर काम करते हुए उसे धीरे-धीरे नया रूप देने का भी मौका मिलेगा।

हालांकि इसका ये मतलब नहीं है कि ब्रिक्स कोई वैकल्पिक विश्व व्यवस्था बना रहा है, बल्कि इसका सीधा मतलब ये है कि ये बदलती हुई व्यवस्था के भीतर ज्यादा प्रभाव हासिल करने की कोशिश है।

इससे पहले ब्रिक्स के आयोजन को लेकर ग्लोबल साउथ को लेकर भी खूब चर्चा हुई। इसके बाद लोगों ने ये सर्च करना शुरू किया कि क्या है ग्लोबल साउथ, इसकी मांगें क्या हैं और BRICS देशों के लिए क्यों है इतना अहम?

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